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धान घोटाले में अब फंस सकते हैं विभागों के बड़े अधिकारी

पैसे देकर धान खरीद में ड्यूटी लगवाई थी कर्मचारियों ने

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सत्य खबर हरियाणा

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Paddy Scam : करनाल जिले में हुए करीब सात करोड़ रुपये के धान घोटाले में 5 अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद कई मिलर और बड़े आढ़ती भूमिगत हैं। वहीं, एसआईटी निरीक्षकों की गिरफ्तारी के बाद अब बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकती है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि एसआईटी की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए निरीक्षकों ने अपने विभाग में रुपये देकर धान खरीद में अपनी ड्यूटी लगवाई थी। इस एंगल पर जांच चल रही है। अगर ऐसा पाया जाता है तो घोटाले में बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी होना तय है।
एसआईटी द्वारा घोटाले में शामिल आढ़तियों, मिलर की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है लेकिन सभी अपने ठिकानों से भूमिगत हैं। वहीं, दूसरी ओर धान सीजन में ट्रांसपोर्ट का काम करने वाले कई लोगों ने अभी तक बिल भी क्लेम नहीं किए हैं। क्योंकि धान घोटाला किसी एक विभाग के या किसी एक अधिकारी की संलिप्तता से नहीं हो सकता। इसमें मार्केट कमेटी, खरीद एजेंसी, मिलर, आढ़ती, ट्रांसपोर्टर सहित अन्य शामिल होते हैं। ऐसे में सभी जब एक साथ मिल जाते हैं तो भ्रष्टाचार होता है। मामले में एएसपी कांची सिंघल के नेतृत्व में बनाई एसआईटी ने छह फरवरी को वेयर हाउस के सहायक तकनीशियन प्रदीप, हैफेड के असंध प्रबंधक प्रमोद, निसिंग प्रबंधक दर्शन सिंह, खाद्य एवं आपूर्ति के तरावड़ी मंडी के निरीक्षक देवेंद्र और इंद्री मंडी के निरीक्षक रणधीर को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पुलिस की आरोपियों से धान घोटाले को लेकर अहम जानकारी मिली है। उसी जानकारी के आधार पर धान घोटाले में पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। धान सीजन से जुड़े विभागों के अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है।
नवंबर माह में करनाल की नई अनाज मंडी में हुए फर्जी गेटपास मामले में एसआईटी मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली और दो कंप्यूटर ऑपरेटर अंकुश व अंकित को गिरफ्तार कर चुकी है। उनसे 5.25 लाख रुपये की बरामदगी हुई थी। फिर नरेश गर्ग नामक आढ़ती को पकड़ा था। जबकि जनवरी में आढ़ती एवं मिलर देवेंद्र को गिरफ्तार करके दो लाख रुपये की बरामदगी हुई थी। वहीं वीरवार को पुलिस ने मामले में दो आढ़तियों महावीर और सुरेंद्र की गिरफ्तारी की थी।

आने वाले समय में और गिरफ्तारियां संभव

करनाल एएसपी कंचन सिंघल ने बताया कि हमने धान घोटाले के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने पूरे मामले की जांच की। जांच के दौरान अलग-अलग अनाज मंडी, राइस मिल और वेयर हाउस के रिकॉर्ड की जांच की गई। दस्तावेज और तकनीकी जांच के पांच अधिकारियों को करनाल से गिरफ्तार भी किया गया है। मामले में कई अधिकारी और कर्मचारियों को सस्पेंड किया है। गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई है। आने वाले समय में और गिरफ्तारी संभव है। संभावना है कि जांच का दायरा बढ़ने पर कई राइस मिलर भी जेल जा सकते हैं।

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क्या मिला जांच में

जांच में सामने आया कि गड़बड़ी में शामिल कर्मचारी-अधिकारियों के द्वारा फर्जी गेट पास जारी कर किया गया, जबकि वहां ना तो वाहन था और ना धान। गड़बड़ी के लिए कुछ ऐसे फर्जी गेट पास काटे गए हैं जिनके कंप्यूटर सिस्टम का आईपी एड्रेस कहीं और का था। जांच में यह भी सामने आया है कि कई राइस मिलों में कागजों में धान का स्टॉक जो दिखाया गया था, वह धान भौतिक रूप से स्टॉक नहीं था। अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी स्टॉक तैयार किया गया है। ये गबन पिछले लंबे समय से चला आ रहा था।

क्या बोले नेता प्रतिपक्ष

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नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान घोटाले में आरोप लगाते हुए कहा है कि इसमें सरकार सही तरीके से जांच नहीं कर रही है। छोटे-मोटे अधिकारी-कर्मचारियों को ही जांच के दायरे में लाया जा रहा है। यह घोटाला बिना बड़े सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। इसलिए इस मामले की सही तरीके से जांच होनी चाहिए। फर्जी गेट पास काटकर ये बड़ा घोटाला किया गया है। सरकार निष्पक्ष होकर मामले की जांच करें।

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